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AI की आंखों से बचना क्यों जरूरी? डिजिटल प्राइवेसी का नया खतरा


आजकल डिजिटल प्राइवेसी केवल ऑनलाइन शॉपिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा संग्रह, विश्लेषण और AI प्रशिक्षण से जुड़ी है। यह समाज और नागरिक अधिकारों के लिए ...और पढ़ें




AI की आंखों से बचना क्यों जरूरी? डिजिटल प्राइवेसी का नया खतरा

 आज के दस साल पहले ज्यादातर लोग डिजिटल प्राइवेसी को आनलाइन शॉपिंग से जोड़कर देखते थे। उनका मानना था कि मैं क्या खरीद रहा हूं या क्या सर्च कर रहा हूं, यह कंपनियों को पता भी चल जाएगा, तो क्या फर्क पड़ता है, लेकिन बात अब डेटा कलेक्शन तक ही सीमित नहीं है, इसका विश्लेषण भी किया जाता है और इससे AI मॉडल को प्रशिक्षित भी।


इसके उपयोग से अधिक अब दुरुपयोग के खतरे हैं, यहां तक कि पूरे समाज और नागरिक अधिकारों के लिए भी यह खतरा बन सकता है। बीते कुछ वर्षों में टेक कंपनियों ने लोगों के दिमाग में यह बात डाल दी है कि आपके डेटा फीड से AI चैटबाट बेहतर होते जाएंगे।

लेकिन असली खतरा संवेदनशील गोपनीय जानकारियों को लेकर है। उदाहरण के तौर पर, यूजर के फिटनेस डिवाइस से कलेक्ट हेल्थ रिकॉर्ड यूजर की सेहत की पिक्चर तो दिखा सकता है, पर क्रिमिनल्स के हाथ में पहुंचा यह डेटा न केवल यूजर के लिए, बल्कि हेल्थकेयर सिस्टम के लिए भी खतरे पैदा कर सकता है।

किस तरह के हैं खतरे






हाल के वर्षों में अस्पतालों और हेल्थकेयर सिस्टम पर साइबर हमलों की संख्या बढ़ी है, इसके पीछे डेटा कलेक्शन का केंद्रीकरण एक बड़ा कारण है। इसी तरह बेहद पर्सनलाइज्ड फिशिंग हमलों और डीपफेक के मामलों में भी पर्सनल डेटा में सेंध के कारण ही वृद्धि हुई है। इसी तरह संवेदनशील जानकारियों में सेंध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।


हालांकि, माइक्रोसाफ्ट जैसी कंपनियां यह भी दावा करती हैं कि हेल्थ डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और उसका प्रयोग AI को ट्रेंड करने या टारगेटेड विज्ञापन दिखाने के लिए नहीं किया जाता। केवल वैध कानूनी अनुरोध पर ही प्रवर्तन एजेंसियों के साथ यह डेटा शेयर किया जा सकता है। फिर भी प्राइवेसी के लिए डेटा संग्रह से लेकर AI मॉडल के डिजाइन और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को समझने की जरूरत है। कुछ बातों पर हमें गौर करना होगा, जैसे:


संवेदनशील डेटा का संग्रह : टेक्स्ट, इमेज या वीडियो के रूप में डेटा एआइ सिस्टम की ट्रेनिंग के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें से कुछ हेल्थकेयर, इंटरनेट मीडिया, पर्सनल फाइनेंस, बायोमीट्रिक डेटा भी शामिल हो सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि पहले से कहीं अधिक संवेदनशील डेटा को इकट्ठा, स्टोर और ट्रांसमिट किया जा रहा है।


बिना सहमति के डेटा संग्रह : यूजर की बगैर सहमति या जानकारी के उसके डेटा का प्रयोग एआइ के लिए किया जा रहा है। इसे लेकर विवाद भी हो चुके हैं। लिंक्डइन पर कुछ यूजर्स का आरोप था कि उनकी सहमति के बिना उनके डेटा का प्रयोग जेनरेटिव एआइ मॉडल की ट्रेनिंग के लिए प्रयोग किया जा रहा था।




बिना अनुमति के डेटा प्रयोग : सबसे बड़ा खतरा यह है कि जिन उद्देश्यों के लिए डेटा की अनुमति यूजर से ली गई है, कहीं अन्य कार्यों के लिए उसका प्रयोग तो नहीं हो रहा है। यहां तक कि रिज्यूम से भी जानकारियां निकालकर एआइ सिस्टम की ट्रेनिंग जैसे मामले सामने आ चुके हैं।


निगरानी से मुक्त : एआइ का प्रयोग निगरानी डेटा के विश्लेषण के लिए भी किया जाता है। सार्वजनिक सुरक्षा कैमरों से लेकर पर्सनल कंप्यूटर के कुकीज में एआइ के प्रयोग से चिंताएं बढ़ गई हैं।

डेटा लीकेज : किसी दुर्घटनावश संवेदनशील डेटा लीक भी हो सकता है। कई एआइ मॉडल इस तरह के जोखिम से इम्यून नहीं हैं। मान लें कोई फाइनेंशियल कंपनी यूजर डेटा के आधार पर एआइ पावर्ड एप को डेवलप कर रही है और किसी कारणवश एप का डेटा अनजाने में किसी अन्य यूजर के साथ साझा हो गया, ऐसे में प्राइवेसी की चिंताएं बढ़ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि हर स्तर पर अपने डेटा को लेकर अलर्ट, व्यवस्थित और सावधान हुआ जाए।

इन तरीकों से कम रहेगा जोखिम



गूगल, एपल या माइक्रोसॉफ्ट से साइन इन से बचें

ओपनआई या किसी अन्य AI प्लेटफार्म पर आपको गूगल, माइक्रोसाफ्ट या एपल अकाउंट से साइन इन का आप्शन मिलता है। इससे आपकी कुछ जानकारियां साझा हो सकती हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि अपने ईमेल और नए पासवर्ड के साथ साइन अप करें। इसके लिए मजबूत और सुरक्षित पासवर्ड बनाएं। अकाउंट के प्रभावित होने पर आप आसानी से पासवर्ड बदल सकेंगे।


बिना अकाउंट करें प्रयोग

अगर आप चैटजीपीटी का प्रयोग कर रहे हैं तो कुछ बेसिक जानकारियों और प्रश्नों को अपने अकाउंट से साइन इन किए बिना भी पूछ सकते हैं। हालांकि, कई सारी सेवाएं सब्सक्रिप्शन पर ही मिलती हैं।

टेंपरेरी चैट का प्रयोग

अकाउंट के साथ साइन इन करने पर चैटजीपीटी आपके कन्वर्सेशन की हिस्ट्री को सेव करता है और उससे खुद को ट्रेंड करता है। चैटजीपीटी के विंडो के दाहिने तरफ ऊपरी कोने पर जाकर टेंपरेरी चैट आइकन को आन कर सकते हैं।


मॉडल ट्रेनिंग को टर्न आफ करें

अपनी बातचीत पर होने वाली मॉडल ट्रेनिंग को आप रोक सकते हैं। अपने अकाउंट नेम पर क्लिक करके सेटिंग में जाएं और डेटा कंट्रोल पर टैप करें। यहां मॉडल ट्रेनिंग को टर्न आफ कर दें।

ब्राउजर डेटा को डिलीट करें

चैटजीपीटी के पेड सब्सक्रिप्शन में कुकीज स्टोरेज को रोक सकते हैं। इसके लिए सेटिंग में जाकर डेटा कंट्रोल और फिर रिमोट ब्राउजर डेटा का आप्शन चुनें। इस प्रोसेस को बंद करने के लिए, 'रिमेंबर साइट डेटा बिटवीन सेशंस' को आफ कर दें। स्टोर की गई सभी मौजूदा कुकीज को डिलीट करने के लिए 'डिलीट आल' चुनें। कन्फर्मेशन विंडो पर 'डिलीट' क्लिक करें।


एक्सपर्ट कमेंट.......

अपने डेटा को लेकर सतर्क होने की जरूरत
तुषार धवन, पार्टनर, Plus91Labs


AI के इस दौर में गोपनीयता को अब डिफॉल्ट सेटिंग्स पर नहीं छोड़ा जा सकता है। इसे गंभीरता के साथ मैनेज करना होगा। आज अधिकांश डेटा जोखिम हैकिंग से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की चूक जैसे, अत्यधिक डेटा साझा करने और बिना जांचे परखें अनुमति देने जैसी आदतों से उत्पन्न होते हैं।

यूजर्स को मल्टी-फैक्टर आथेंटिकेशन एनेबल करने और नियमित रूप से एप परमिशन की समीक्षा करते रहना चाहिए। वहीं, संगठनों को ‘प्राइवेसी बाय डिजाइन’ के सिद्धांत पर काम करते हुए ऐसे सिस्टम बनाने चाहिए, जो पारदर्शिता, नियंत्रण और डेटा के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करें।
ऐसा डेटा कभी शेयर न करेंक्रिडेंशियल : यूजरनेम, पासवर्ड,सिक्योरिटी क्वेश्चंस आदि।
फाइनेंशियल : क्रेडिट कार्ड नंबर, बैंक डिटेल्स, टैक्स जानकारी।
पर्सनल हेल्थ : मेडिकल रिकार्ड के बारे में न बताएं।
अन्य जानकारी : प्रापर्टी कोड, मार्केटिंग प्लान आदि।
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