तेल की कीमतों पर अब ट्र्ंप का काबू? 60 दिन के लिए 'जोन्स एक्ट' में दी छूट; अमेरिका का बड़ा फैसला
तेल की कीमतों पर अब ट्र्ंप का काबू? 60 दिन के लिए 'जोन्स एक्ट' में दी छूट; अमेरिका का बड़ा फैसला
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 60 दिनों के लिए 100 साल पुराने जोन्स एक्ट में अस्थायी छूट दी है। ...और पढ़ें
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ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का कदम विदेशी जहाजों को मिली अस्थायी अनुमति (फाइल फोटो)
ट्रंप ने 60 दिनों के लिए जोन्स एक्ट में छूट दी।
ईरान संघर्ष से बढ़ी तेल कीमतों पर नियंत्रण का लक्ष्य।
विदेशी जहाज अब अमेरिकी बंदरगाहों के बीच सामान ले जाएंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को काबू में लाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने 100 साल पुराने जोन्स एक्ट में 60 दिनों के लिए अस्थायी छूट दी है, ताकि देश में तेल और अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति आसान हो सके।
ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में तेजी आई है, जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इस फैसले के तहत अब 60 दिनों तक विदेशी जहाज भी अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सामान ले जा सकेंगे।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस ने इसे आपात कदम बताते हुए कहा कि इसका मकसद तेल बाजार में आई अस्थायी दिक्कतों को कम करना है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह कदम “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के दौरान बाजार में आई बाधाओं को कम करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि इससे तेल, गैस, खाद और कोयला जैसे जरूरी संसाधनों की आपूर्ति 60 दिनों तक आसानी से हो सकेगी।
क्या है जोन्स एक्ट?
जोन्स एक्ट 1920 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी शिपिंग इंडस्ट्री को मजबूत करना था। इसके तहत अमेरिका के भीतर एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सामान ले जाने के लिए अमेरिकी जहाजों का इस्तेमाल जरूरी होता है। आलोचकों का कहना है कि यह नियम प्रतिस्पर्धा को कम करता है और संकट के समय परिवहन लागत बढ़ा देता है।
युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतें 27 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इजरायल के हमलों के बाद तेल की कीमतें भी बढ़ीं, जिसमें ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असर
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने से हालात और बिगड़े हैं। यह रास्ता दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस वजह से वैश्विक बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और कीमतें ऊपर चली गई हैं।
ट्रंप प्रशासन ने तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA पर कुछ पाबंदियों में ढील दी है, ताकि अमेरिकी कंपनियां वहां से तेल खरीद सकें। हालांकि यह पूरी तरह से प्रतिबंध हटाना नहीं है, लेकिन इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 60 दिनों के लिए 100 साल पुराने जोन्स एक्ट में अस्थायी छूट दी है। ...और पढ़ें
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ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का कदम विदेशी जहाजों को मिली अस्थायी अनुमति (फाइल फोटो)
ट्रंप ने 60 दिनों के लिए जोन्स एक्ट में छूट दी।
ईरान संघर्ष से बढ़ी तेल कीमतों पर नियंत्रण का लक्ष्य।
विदेशी जहाज अब अमेरिकी बंदरगाहों के बीच सामान ले जाएंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को काबू में लाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने 100 साल पुराने जोन्स एक्ट में 60 दिनों के लिए अस्थायी छूट दी है, ताकि देश में तेल और अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति आसान हो सके।
ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में तेजी आई है, जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इस फैसले के तहत अब 60 दिनों तक विदेशी जहाज भी अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सामान ले जा सकेंगे।
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस ने इसे आपात कदम बताते हुए कहा कि इसका मकसद तेल बाजार में आई अस्थायी दिक्कतों को कम करना है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह कदम “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के दौरान बाजार में आई बाधाओं को कम करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि इससे तेल, गैस, खाद और कोयला जैसे जरूरी संसाधनों की आपूर्ति 60 दिनों तक आसानी से हो सकेगी।
क्या है जोन्स एक्ट?
जोन्स एक्ट 1920 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी शिपिंग इंडस्ट्री को मजबूत करना था। इसके तहत अमेरिका के भीतर एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सामान ले जाने के लिए अमेरिकी जहाजों का इस्तेमाल जरूरी होता है। आलोचकों का कहना है कि यह नियम प्रतिस्पर्धा को कम करता है और संकट के समय परिवहन लागत बढ़ा देता है।
युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतें 27 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इजरायल के हमलों के बाद तेल की कीमतें भी बढ़ीं, जिसमें ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असर
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने से हालात और बिगड़े हैं। यह रास्ता दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस वजह से वैश्विक बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और कीमतें ऊपर चली गई हैं।
ट्रंप प्रशासन ने तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA पर कुछ पाबंदियों में ढील दी है, ताकि अमेरिकी कंपनियां वहां से तेल खरीद सकें। हालांकि यह पूरी तरह से प्रतिबंध हटाना नहीं है, लेकिन इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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Videsh
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