'इससे बढ़िया मौका नहीं मिलेगा', खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले नेतन्याहू ने ट्रंप को फोन पर बताया था प्लान
'इससे बढ़िया मौका नहीं मिलेगा', खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले नेतन्याहू ने ट्रंप को फोन पर बताया था प्लान
ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से पहले नेतन्याहू ने ट्रंप से फोन पर बात की थी। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि यह ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को निशाना बन ...और पढ़ें
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नेतन्याहू ने ट्रंप को खामेनेई पर हमले का अवसर बताया
ट्रंप ने पहले युद्ध से बचने की इच्छा जताई थी
अमेरिका-इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका-इजरायल का हमला शुरू होने से 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। इस वार्ता में उन्होंने ट्रंप को यह युद्ध शुरू करने के कारणों के बारे में बताया था।
दोनों नेताओं के बीच फोन पर वार्ता की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि इंटेलिजेंस ब्रीफिंग से उसी हफ्ते ट्रंप और नेतन्याहू दोनों को पता चल गया था कि ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके मुख्य सहयोगी जल्द ही तेहरान स्थित अपने परिसर में बैठक करेंगे।
नेतन्याहू ने दिया था तर्क
इसके बाद उन्हें नई खुफिया जानकारी मिली थी कि खामेनेई की बैठक का समय शनिवार रात के बजाय शनिवार सुबह कर दिया गया है। नेतन्याहू इस अभियान पर आगे बढ़ाने के लिए ढूढ़ थे। उन्होंने तर्क दिया था कि खामेनेई को मारने और ट्रंप की हत्या के ईरान के पिछले प्रयासों का बदला लेने का इससे बेहतर मौका शायद फिर कभी नहीं मिलेगा।
इन प्रयासों में 2024 में ईरान द्वारा रची गई एक कथित साजिश शामिल थी, जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। सूत्रों ने बताया कि जब नेतन्याहू ने फोन किया, तब तक ट्रंप ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विचार को मंजूरी दे चुके थे, लेकिन उन्होंने यह तय नहीं किया था कि अमेरिका कब या किन परिस्थितियों में इसमें शामिल होगा।
नेतन्याहू की दलीलों का ट्रंप पर असर
यह तो पता नहीं लग सका कि नेतन्याहू की दलीलों का ट्रंप पर क्या असर पड़ा, लेकिन सूत्रों का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता को मारने का मौका हाथ से निकलने का खतरा ट्रंप के फैसले का मुख्य कारण बना। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि ट्रंप, ईरान के उस नेतृत्व को खत्म करने में मदद करके इतिहास रच सकते हैं, जिसे पश्चिमी देश और कई ईरानी नागरिक लंबे समय से नापसंद करते आए हैं।
उन्होंने कहा कि संभव है कि ईरानी लोग सड़कों पर उतर आएं और धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकें।
ईरान के साथ युद्ध से बचना चाहते थे ट्रंप
ट्रंप ने 2024 में अपना चुनाव अभियान अपने पहले कार्यकाल की विदेश नीति ''अमेरिका फर्स्ट'' के आधार पर चलाया और सार्वजनिक रूप से कहा कि वह ईरान के साथ युद्ध से बचना चाहते हैं और तेहरान के साथ कूटनीतिक तरीके से निपटना पसंद करेंगे।
लेकिन व्हाइट हाउस के सूत्रों ने बताया कि जब पिछले वसंत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाई, तो ट्रंप ने हमला करने पर विचार करना शुरू कर दिया था। इसके बाद जून में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी।
कूटनीतिक बातचीत चाहते थे ट्रंप
दिसंबर में फ्लोरिडा में ट्रंप के मार-ए-लागो एस्टेट के दौरे के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा था कि वह जून में हुए संयुक्त ऑपरेशन के नतीजों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। तब ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह एक और बमबारी अभियान के लिए तैयार हैं, लेकिन वे कूटनीतिक बातचीत का एक और दौर भी आजमाना चाहते थे।
इस वर्ष ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन शुरू होने के बाद इजरायली डिफेंस फोर्सेज व अमेरिकी सेना की मिडिल ईस्ट कमांड 'सेंटकाम' के बीच गोपनीय तरीके से समन्वय पर बातचीत ने जोर पकड़ लिया था। फरवरी में अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी थी और अमेरिका तक हमले कर सकने के खतरे से भी अवगत कराया था।
ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से पहले नेतन्याहू ने ट्रंप से फोन पर बात की थी। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि यह ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को निशाना बन ...और पढ़ें
नेतन्याहू ने ट्रंप को खामेनेई पर हमले का अवसर बताया
ट्रंप ने पहले युद्ध से बचने की इच्छा जताई थी
अमेरिका-इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका-इजरायल का हमला शुरू होने से 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। इस वार्ता में उन्होंने ट्रंप को यह युद्ध शुरू करने के कारणों के बारे में बताया था।
दोनों नेताओं के बीच फोन पर वार्ता की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि इंटेलिजेंस ब्रीफिंग से उसी हफ्ते ट्रंप और नेतन्याहू दोनों को पता चल गया था कि ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके मुख्य सहयोगी जल्द ही तेहरान स्थित अपने परिसर में बैठक करेंगे।
नेतन्याहू ने दिया था तर्क
इसके बाद उन्हें नई खुफिया जानकारी मिली थी कि खामेनेई की बैठक का समय शनिवार रात के बजाय शनिवार सुबह कर दिया गया है। नेतन्याहू इस अभियान पर आगे बढ़ाने के लिए ढूढ़ थे। उन्होंने तर्क दिया था कि खामेनेई को मारने और ट्रंप की हत्या के ईरान के पिछले प्रयासों का बदला लेने का इससे बेहतर मौका शायद फिर कभी नहीं मिलेगा।
इन प्रयासों में 2024 में ईरान द्वारा रची गई एक कथित साजिश शामिल थी, जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। सूत्रों ने बताया कि जब नेतन्याहू ने फोन किया, तब तक ट्रंप ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विचार को मंजूरी दे चुके थे, लेकिन उन्होंने यह तय नहीं किया था कि अमेरिका कब या किन परिस्थितियों में इसमें शामिल होगा।
नेतन्याहू की दलीलों का ट्रंप पर असर
यह तो पता नहीं लग सका कि नेतन्याहू की दलीलों का ट्रंप पर क्या असर पड़ा, लेकिन सूत्रों का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता को मारने का मौका हाथ से निकलने का खतरा ट्रंप के फैसले का मुख्य कारण बना। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि ट्रंप, ईरान के उस नेतृत्व को खत्म करने में मदद करके इतिहास रच सकते हैं, जिसे पश्चिमी देश और कई ईरानी नागरिक लंबे समय से नापसंद करते आए हैं।
उन्होंने कहा कि संभव है कि ईरानी लोग सड़कों पर उतर आएं और धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकें।
ईरान के साथ युद्ध से बचना चाहते थे ट्रंप
ट्रंप ने 2024 में अपना चुनाव अभियान अपने पहले कार्यकाल की विदेश नीति ''अमेरिका फर्स्ट'' के आधार पर चलाया और सार्वजनिक रूप से कहा कि वह ईरान के साथ युद्ध से बचना चाहते हैं और तेहरान के साथ कूटनीतिक तरीके से निपटना पसंद करेंगे।
लेकिन व्हाइट हाउस के सूत्रों ने बताया कि जब पिछले वसंत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाई, तो ट्रंप ने हमला करने पर विचार करना शुरू कर दिया था। इसके बाद जून में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी।
कूटनीतिक बातचीत चाहते थे ट्रंप
दिसंबर में फ्लोरिडा में ट्रंप के मार-ए-लागो एस्टेट के दौरे के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा था कि वह जून में हुए संयुक्त ऑपरेशन के नतीजों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। तब ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह एक और बमबारी अभियान के लिए तैयार हैं, लेकिन वे कूटनीतिक बातचीत का एक और दौर भी आजमाना चाहते थे।
इस वर्ष ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन शुरू होने के बाद इजरायली डिफेंस फोर्सेज व अमेरिकी सेना की मिडिल ईस्ट कमांड 'सेंटकाम' के बीच गोपनीय तरीके से समन्वय पर बातचीत ने जोर पकड़ लिया था। फरवरी में अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी थी और अमेरिका तक हमले कर सकने के खतरे से भी अवगत कराया था।
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