सोशल मीडिया का नया ट्रेंड: ‘यूनिक चेहरा’ हो रहा गायब? डिजिटल दौर में सुंदरता बदली
सोशल मीडिया का नया ट्रेंड: ‘यूनिक चेहरा’ हो रहा गायब? डिजिटल दौर में सुंदरता बदली
डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने चेहरे की पहचान को प्रभावित किया है। फिल्टर और एडिटिंग टूल्स ने एक 'आदर्श चेहरा' बनाया है, जिससे लोग अपनी अनूठी विशेषताओं ...और पढ़ें

आज के इस डिजिटल दौर में जहां टेक्नोलॉजी ने इंसानों की लाइफ को काफी ज्यादा आसान किया है, वहीं चेहरे की असली पहचान पर अब गंभीर असर भी डाला है। जी हां, कभी ऐसा माना जाता था कि हर इंसान का चेहरा उसकी एक अलग पहचान है जैसे उसकी आंखें, नाक, होंठ और अभिव्यक्तियां मिलकर उसकी ‘यूनीकनेस’ क्रिएट करती थीं, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने फेस को भी ट्रेंड का हिस्सा बना लिया है, जहां सुंदरता के मानक अब एल्गोरिदम से सेट होने लगे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के दौर में लोगों का फेस भी फैशन की तरह चेंज होने लगे हैं। फिल्टर और फोटो एडिटिंग टूल्स ने एक ऐसा ‘आइडियल फेस’ तैयार कर दिया है, जिसे लाखों यूजर फॉलो करने की कोशिश में जुटे हैं। इसका रिजल्ट ये है कि लोगों के ‘यूनिक चेहरे’ गायब हो रहे हैं। चलिए आज इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं...
एक जैसा दिखने लगा है सोशल मीडिया
ऐंथ्रोपोलॉजिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि Instagram, TikTok जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम उन चेहरों को ज्यादा बढ़ावा देते हैं जो ट्रेंडिंग फीचर्स जैसे एक जैसी नाक, भरे होंठ, तीखा जॉलाइन या परफेक्ट स्किन के पैटर्न पर फिट बैठते हैं। इससे यूजर्स को वही फेस वाले कंटेंट बार-बार दिखाई देते हैं और धीरे-धीरे वही ‘स्टैंडर्ड ऑफ ब्यूटी’ बन जाता है।
वहीं, इस पर डॉक्टर्स का कहना है कि लोग ऐसे ही चेहरे पाने के लिए कॉस्मेटिक क्लीनिक्स तक जा रहे हैं। कई मामलों में युवा अपने असली चेहरे से तुलना कर काम्प्लेक्स में जा रहे हैं।
सर्जरी और टेक्नोलॉजी से कर रहे उम्र ‘रीसेट’
एस्थेटिक सर्जरी एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि चेहरे की उम्र को रिवर्स या स्लो करना बेहद आसान हो गया है। हाई-टेक स्किन ट्रीटमेंट, फेस-लिफ्टिंग प्रोसेस और AI पॉवर्ड ब्यूटी स्कैनिंग ने एक नया मार्केट तैयार कर दिया है। इतना ही नहीं डॉक्टर्स का ये भी कहना है कि अब ज्यादातर युवा सिर्फ मेकओवर ही नहीं बल्कि अपने फेस को ‘ट्रेंड के मुताबिक’ बनाने की डिमांड भी लेकर आ रहे हैं।
सुंदरता पर बड़ा संकट
ह्यूमन बिहेवियर एक्सपर्ट्स का मत है कि एक जैसे चेहरे समाज की पहचान, विविधता और मेन्टल हेल्थ तीनों पर असर डाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली खूबसूरती का दबाव युवाओं को इमप्रॅक्टिकल स्टैंडर्ड्स की तरफ धकेल रहा है। फ्यूचर में अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो दुनिया भर के चेहरे एक ही डिजिटल ढांचे में ढलते दिखाई देंगे, जो इंसानी पहचान के लिए खतरा है।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने चेहरे की पहचान को प्रभावित किया है। फिल्टर और एडिटिंग टूल्स ने एक 'आदर्श चेहरा' बनाया है, जिससे लोग अपनी अनूठी विशेषताओं ...और पढ़ें

आज के इस डिजिटल दौर में जहां टेक्नोलॉजी ने इंसानों की लाइफ को काफी ज्यादा आसान किया है, वहीं चेहरे की असली पहचान पर अब गंभीर असर भी डाला है। जी हां, कभी ऐसा माना जाता था कि हर इंसान का चेहरा उसकी एक अलग पहचान है जैसे उसकी आंखें, नाक, होंठ और अभिव्यक्तियां मिलकर उसकी ‘यूनीकनेस’ क्रिएट करती थीं, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने फेस को भी ट्रेंड का हिस्सा बना लिया है, जहां सुंदरता के मानक अब एल्गोरिदम से सेट होने लगे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के दौर में लोगों का फेस भी फैशन की तरह चेंज होने लगे हैं। फिल्टर और फोटो एडिटिंग टूल्स ने एक ऐसा ‘आइडियल फेस’ तैयार कर दिया है, जिसे लाखों यूजर फॉलो करने की कोशिश में जुटे हैं। इसका रिजल्ट ये है कि लोगों के ‘यूनिक चेहरे’ गायब हो रहे हैं। चलिए आज इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं...
एक जैसा दिखने लगा है सोशल मीडिया
ऐंथ्रोपोलॉजिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि Instagram, TikTok जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम उन चेहरों को ज्यादा बढ़ावा देते हैं जो ट्रेंडिंग फीचर्स जैसे एक जैसी नाक, भरे होंठ, तीखा जॉलाइन या परफेक्ट स्किन के पैटर्न पर फिट बैठते हैं। इससे यूजर्स को वही फेस वाले कंटेंट बार-बार दिखाई देते हैं और धीरे-धीरे वही ‘स्टैंडर्ड ऑफ ब्यूटी’ बन जाता है।
वहीं, इस पर डॉक्टर्स का कहना है कि लोग ऐसे ही चेहरे पाने के लिए कॉस्मेटिक क्लीनिक्स तक जा रहे हैं। कई मामलों में युवा अपने असली चेहरे से तुलना कर काम्प्लेक्स में जा रहे हैं।
सर्जरी और टेक्नोलॉजी से कर रहे उम्र ‘रीसेट’
एस्थेटिक सर्जरी एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि चेहरे की उम्र को रिवर्स या स्लो करना बेहद आसान हो गया है। हाई-टेक स्किन ट्रीटमेंट, फेस-लिफ्टिंग प्रोसेस और AI पॉवर्ड ब्यूटी स्कैनिंग ने एक नया मार्केट तैयार कर दिया है। इतना ही नहीं डॉक्टर्स का ये भी कहना है कि अब ज्यादातर युवा सिर्फ मेकओवर ही नहीं बल्कि अपने फेस को ‘ट्रेंड के मुताबिक’ बनाने की डिमांड भी लेकर आ रहे हैं।
सुंदरता पर बड़ा संकट
ह्यूमन बिहेवियर एक्सपर्ट्स का मत है कि एक जैसे चेहरे समाज की पहचान, विविधता और मेन्टल हेल्थ तीनों पर असर डाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली खूबसूरती का दबाव युवाओं को इमप्रॅक्टिकल स्टैंडर्ड्स की तरफ धकेल रहा है। फ्यूचर में अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो दुनिया भर के चेहरे एक ही डिजिटल ढांचे में ढलते दिखाई देंगे, जो इंसानी पहचान के लिए खतरा है।
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