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चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाने की तैयारी में एलन मस्क, बोले- कोडिंग के लिए खत्म होगी इंसानों की जरूरत

चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाने की तैयारी में एलन मस्क, बोले- कोडिंग के लिए खत्म होगी इंसानों की जरूरत


एलन मस्क ने अपनी AI कंपनी xAI के लिए एक बड़ा विजन पेश किया है। वे चंद्रमा पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, ताकि अंतरिक्ष में ...और पढ़ें








टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। एनवीडिया के CEO Jensen Huang ने हाल ही में कहा था कि दुनिया का सबसे तेज AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की क्षमता अगर किसी में है, तो वह Elon Musk हैं। अब मस्क ने अपनी AI कंपनी xAI की एक इंटरनल मीटिंग में इससे भी बड़ा विजन सामने रखा है। वे चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस साल के अंत तक कोडिंग के लिए इंजीनियरों की जरूरत नहीं होगी।

चांद पर AI फैक्ट्री का प्लान

एलन मस्क का कहना है कि इंसान अभी पृथ्वी पर उपलब्ध ऊर्जा का सिर्फ लगभग 1 प्रतिशत हिस्से का ही यूज कर पा रहा है। उन्होंने इंटरनल मीटिंग में बताया कि यदि हम सूर्य की ऊर्जा का मात्र दस लाखवां हिस्सा भी इस्तेमाल कर लें, तो वह इंसान जो अभी ऊर्जा की खपत कर रहा है। उससे लाखों गुना अधिक होगी। इस ऊर्जा को इस्तेमाल करने के लिए इंसान को धरती की सीमा के बाहर अंतरिक्ष में जाना होगा।


स्पेस में मेगा डेटा सेंटर

एलन मस्क ने अपनी योजना के बारे में बताया कि उनकी स्पेस कंपनी SpaceX की मदद से वे अंतरिक्ष में 100 से 200 गीगावॉट क्षमता वाले डेटा सेंटर स्थापित करेंगे। शुरुआत में उनका फोकस 'अर्थ ऑर्बिटल डेटा सेंटर' पर रहेगा। हालांकि, उनका मानना है कि यदि 1 टेरावॉट से अधिक क्षमता चाहिए, तो चांद पर जाना होगा। इसके लिए वे वहां AI सैटेलाइट निर्माण फैक्ट्री स्थापित करने की भी तैयारी कर रहे हैं।



क्या है मस्क का ‘माइक्रोहार्ड’ प्रोजेक्ट

चांद पर एआई फैक्ट्री लगाने के लिए मस्क ने अपनी योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने माइक्रोहार्ड प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जो असल में माइक्रोसॉफ्ट पर एक व्यंग्य है। इस प्रोजेक्ट के तहत मस्क एआई से जटिल से जटिल मशीन जैसे रॉकेट के इंजन का डिजाइन करने की योजना पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे मानवीय भूल के चलते प्रोजेक्ट में आने वाली अड़चनों की गुंजाइश नहीं बचेगी।


मस्क ने इसके लिए अपनी एआई कंपनी xAI को चार हिस्सों में बांटा है। पहली टीम Grok है, जो मौजूदा चैटबॉट और वॉइस असिस्टेंट पर काम करेगी। दूसरी कोडिंग टीम - जो डेवलपर टूल्स तैयार करेगी। तीसरी Imagine टीम है, यह वीडियो जनरेशन टूल विकसित करेगी। चौथी टीम माइक्रोहार्ड है। यह AI से एडवांस हार्डवेयर और मशीन डिजाइन पर काम करेगी।

कोडिंग के लिए इंसानों नहीं पड़ेगी जरूरत

इस दौरान मस्क ने बताया कि इस साल के अंत तक कोडिंग के लिए इंसानों की जरूरत खत्म हो जाएगी। उनका एआई मॉडल Grok Code दो से तीन महीने में तैयार हो जाएगा। यह मॉडल किसी अनुभवी इंजीनियर की तरह खुद ही कोड लिख लेगा। इतना ही नहीं किसी सॉफ्टवेयर में मौजूद बग्स को खुद ही फिक्स कर लेगा। उनका मानना है कि यह मॉडल इंसानी हसतक्षेप के बिना जटिल से जटिल कोडिंग करने में सक्षम होगा।
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