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कोडरमा में 10 बिरहोर बच्चे लापता, 6 दिन बाद भी नहीं मिल पाया सुराग

कोडरमा में 10 बिरहोर बच्चे लापता, 6 दिन बाद भी नहीं मिल पाया सुराग



कोडरमा के जयनगर थाना क्षेत्र के गड़ियाई बिरहोर टोला से 1 फरवरी से दस बच्चे लापता हैं। छह दिन बाद भी उनका पता नहीं चला है, जिससे परिवारों में चिंता है। ...और पढ़ें





 (कोडरमा)। जयनगर थाना क्षेत्र के गड़ियाई बिरहोर टोला से 1 फरवरी से दस बच्चे लापता हैं। छह दिन बीत जाने के बाद भी बच्चों का पता नहीं चल सका है, जिससे बिरहोर परिवारों में दहशत और चिंता का माहौल है। स्वजन ने बताया कि सभी बच्चे परसाबाद में भोज खाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे।


लापता बच्चों में निशा कुमारी (7), रमेश बिरहोर (5), सजनी बिरहोर (8), बिरजू बिरहोर, मिथुन बिरहोर, शिवानी बिरहोर, कल्पना बिरहोर, रेखा बिरहोर (8), अनीशा बिरहोर (6) व एक अन्य बच्चा शामिल है। बच्चों के नहीं लौटने पर 3 फरवरी को स्वजन स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव के पास पहुंचे। इस पर मुखिया ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल इसकी जानकारी जयनगर थाना प्रभारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी।
इसके बावजूद शुरुआती स्तर पर पुलिस की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई। जब 5 फरवरी तक भी उनका कोई सुराग नहीं मिला तो शुक्रवार को बच्चों के स्वजन जयनगर थाना पहुंचे और खोजबीन की गुहार लगाई। इसके बाद मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंचा। इस पर एसपी अनुदीप सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम का गठन किया।


शुक्रवार को प्रशिक्षु डीएसपी दिवाकर कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सुजीत कुमार, तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार, चंदवारा थाना प्रभारी शशिभूषण कुमार, जयनगर थाना प्रभारी उमानाथ सिंह, महिला थाना प्रभारी हेमा कुमारी, तिलैया डैम ओपी प्रभारी सहित टेक्निकल सेल की टीम गड़ियाई बिरहोर टोला पहुंची और स्वजन से पूछताछ की। प्रशिक्षु डीएसपी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और शीघ्र ही बच्चों को खोज निकाला जाएगा।

सूचना के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने नहीं दिखाई तत्परता

स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव ने बताया कि जैसे ही उनकी जानकारी में बच्चों के लापता होने की बात आई, उन्हाेंने तुरंत इसकी सूचना जयनगर थाना प्रभारी और बीडीओ को दी थी, लेकिन दोनों अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।


दोनों ने यह कहकर मामला टाल दिया गया कि बिरहोर समुदाय के लोग घुमक्कड़ होते हैं और बच्चे खुद लौट आएंगे। यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय होता तो शायद बच्चों का जल्द पता चल सकता था। पदाधिकारियों की संवेदनहीनता ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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