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व्हाइट हाउस में मरम्मत के दौरान बाहर आया 85 सालों से दफन राज, किसकी बढ़ेंगी मुश्किलें?

व्हाइट हाउस में मरम्मत के दौरान बाहर आया 85 सालों से दफन राज, किसकी बढ़ेंगी मुश्किलें?



व्हाइट हाउस में 1941 में पर्ल हार्बर हमले के बाद बने गुप्त बंकर का रेनोवेशन हो रहा है। इसे अब नई तकनीक से लैस किया जा रहा है, ताकि बदलते खतरों से निपट ...और पढ़ें







शुरुआत में यह एक बॉम्ब शेल्टर था, लेकिन समय के साथ इसमें कई बदलाव आए। (फोटो सोर्स- व्हाइट हाउस)

HIGHLIGHTS

1941 में बना व्हाइट हाउस का गुप्त बंकर अब अपग्रेड हो रहा है।


यह बंकर 'मिशन क्रिटिकल फंक्शन' और सुरक्षा को मजबूत करेगा।


9/11 जैसे आपातकाल में PEOC का उपयोग किया गया था।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 1941 में पर्ल हार्बर हमले के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने व्हाइट हाउस में एक सीक्रेट बंकर बनवाने का आदेश दिया था। इसके ऊपर ईस्ट विंग का नया हिस्सा बनाया गया, लेकिन बंकर की बात कभी सार्वजनिक नहीं हुई।


अब 80 साल बाद, ईस्ट विंग फिर से निर्माणाधीन है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा बॉलरूम बन रहा है, लेकिन असली रहस्य नीचे छिपा है। अब पुराना बंकर तोड़ दिया गया है और अब नया बनाया जा रहा है।


नई तकनीक से लैस होगा बंकर

अब इस जगह को नई तकनीक से अपडेट किया जा रहा है, ताकि बदलते खतरों से निपटा जा सके। सीएनएन के मुताबिक, नेशनल कैपिटल प्लानिंग कमीशन की बैठक में व्हाइट हाउस के अधिकारी जोशुआ फिशर ने कहा कि प्रोजेक्ट 'मिशन क्रिटिकल फंक्शन' को मजबूत करेगा और सुरक्षा भी बढ़ाएगा।

क्या है इस बंकर का अतीत?

यह बंकर पहले एक सबमरीन जैसा सुरक्षित स्थान था। इसमें प्रेसिडेंशियल इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (पीईओसी) शामिल था। यहां से राष्ट्रपति और उनके स्टाफ आपात स्थिति में काम कर सकते थे। इसका इस्तेमाल कई अहम मौकों पर हुआ, जैसे 9/11 के हमलों के दौरान उपराष्ट्रपति डिक चेनी को यहां ले जाया गया था। हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की यूक्रेन यात्रा की योजना भी यहीं बनी थी।


शुरुआत में यह एक बॉम्ब शेल्टर था, लेकिन समय के साथ इसमें कई बदलाव आए। ईस्ट विंग से नीचे जाकर एक बड़ा वॉल्ट डोर पार करना पड़ता था, जहां बेड, खाना, पानी और कम्युनिकेशन सिस्टम थे।

पीईओसी एक मजबूत कमांड सेंटर था, जो न्यूक्लियर हमले तक झेल सकता था। यह सिचुएशन रूम के साथ मिलकर काम करता था, जहां सिचुएशन रूम रोजमर्रा की निगरानी करता है, जबकि पीईओसी सिर्फ इमरजेंसी के लिए है।
राष्ट्रपतियों का कनेक्शन

इतिहासकार बिल सील के अनुसार, रूजवेल्ट ने इस बंकर का सिर्फ एक बार दौरा किया। उसके बाद हर नए राष्ट्रपति के लिए पहले दिन यहां का दौरा एक परंपरा बन गई, लेकिन पिछले 20 सालों में इसका महत्व कम हो गया। अब यह स्पेस 'टॉम्ब-लाइक' यानी कब्र जैसा लगता था, लेकिन नई जरूरतों के हिसाब से इसे बदला जा रहा है।
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