'ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भरोसा करना अमेरिका की नादानी', ट्रंप पर क्यों भड़के नेतन्याहू के मंत्री?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भरोसा करना अमेरिका की नादानी', ट्रंप पर क्यों भड़के नेतन्याहू के मंत्री?
इजरायली मंत्री बेन-ग्विर ने अमेरिका-ईरान शांति प्रयासों को नादानी बताते हुए कहा कि ईरान परमाणु सपना नहीं छोड़ेगा। लेबनान पर मतभेदों के बीच उन्होंने सं ...और पढ़ें

डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर।
डिजिटल डेस्क, तेल अवीव। पश्चिम एशिया में लगभग चार महीनों से जारी संघर्ष में जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमत हुए। वहीं दूसरी ओर इजरायल अभी भी ईरान और लेबनान के साथ शांति समझौते पर सहमत होने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं इजरायल ने तो दो टूक अंदाज में अमेरिका को नादान बताया। इसके साथ ही ईरान-लेबनान पर अकेले कार्रवाई करने तक की बात कह दी।
इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि जहां एक तरफ अमेरिका-ईरान के साथ हुए शांति समझौते के बाद दुनियाभर में राहत का माहौल है। वहीं दूसरी ओर अब एक बार फिर इजरायल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर का बड़ा बयान सामने आया है।
इजरायली मंत्री ने अमेरिका को क्यों बताया नादान?
नेतन्याहू के मंत्री बेन-ग्विर अमेरिकी फैसले को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि अगर अमेरिका यह सोचता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ देगा, तो यह उसकी बड़ी नादानी होगी। बेन-ग्विर ने साफ शब्दों में संकेत दिया कि ईरान के खतरे से निपटने के लिए इजरायल बिना किसी की मदद के 'अकेले भी कार्रवाई' कर सकता है।
इजरायल के 'चैनल 7' को दिए एक इंटरव्यू में बेन-ग्विर ने कहा कि अमेरिकी बहुत नादान हैं अगर वे सोचते हैं कि ईरानी अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद कर देंगे और इजरायल को तबाह करने का अपना सपना छोड़ देंगे।
इजरायल को कोई मजबूर नहीं कर सकता- ग्विर
ग्विर ने कहा कि इस ईरानी खतरे का डटकर मुकाबला करना और इसके खिलाफ अकेले कार्रवाई करना खुद इजरायल की जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी परिस्थिति इजरायल को किसी दूसरे देश के इशारों पर काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, चाहे वह दोस्त कितना भी बड़ा (अमेरिका) क्यों न हो।
अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ती दूरियां, कहानी क्या?
बता दें कि ग्विर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता करने के लिए बातचीत का दौर चल रहा है, जिससे इजरायल असहज है।
हालांकि, अमेरिका और इजरायल दोनों ही ईरान पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों के लिए खतरा है। वहीं, ईरान हमेशा से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका मकसद कोई परमाणु हथियार बनाना नहीं है।
इजरायली मंत्री बेन-ग्विर ने अमेरिका-ईरान शांति प्रयासों को नादानी बताते हुए कहा कि ईरान परमाणु सपना नहीं छोड़ेगा। लेबनान पर मतभेदों के बीच उन्होंने सं ...और पढ़ें

डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर।
डिजिटल डेस्क, तेल अवीव। पश्चिम एशिया में लगभग चार महीनों से जारी संघर्ष में जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमत हुए। वहीं दूसरी ओर इजरायल अभी भी ईरान और लेबनान के साथ शांति समझौते पर सहमत होने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं इजरायल ने तो दो टूक अंदाज में अमेरिका को नादान बताया। इसके साथ ही ईरान-लेबनान पर अकेले कार्रवाई करने तक की बात कह दी।
इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि जहां एक तरफ अमेरिका-ईरान के साथ हुए शांति समझौते के बाद दुनियाभर में राहत का माहौल है। वहीं दूसरी ओर अब एक बार फिर इजरायल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर का बड़ा बयान सामने आया है।
इजरायली मंत्री ने अमेरिका को क्यों बताया नादान?
नेतन्याहू के मंत्री बेन-ग्विर अमेरिकी फैसले को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि अगर अमेरिका यह सोचता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ देगा, तो यह उसकी बड़ी नादानी होगी। बेन-ग्विर ने साफ शब्दों में संकेत दिया कि ईरान के खतरे से निपटने के लिए इजरायल बिना किसी की मदद के 'अकेले भी कार्रवाई' कर सकता है।
इजरायल के 'चैनल 7' को दिए एक इंटरव्यू में बेन-ग्विर ने कहा कि अमेरिकी बहुत नादान हैं अगर वे सोचते हैं कि ईरानी अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद कर देंगे और इजरायल को तबाह करने का अपना सपना छोड़ देंगे।
इजरायल को कोई मजबूर नहीं कर सकता- ग्विर
ग्विर ने कहा कि इस ईरानी खतरे का डटकर मुकाबला करना और इसके खिलाफ अकेले कार्रवाई करना खुद इजरायल की जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी परिस्थिति इजरायल को किसी दूसरे देश के इशारों पर काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, चाहे वह दोस्त कितना भी बड़ा (अमेरिका) क्यों न हो।
अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ती दूरियां, कहानी क्या?
बता दें कि ग्विर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता करने के लिए बातचीत का दौर चल रहा है, जिससे इजरायल असहज है।
हालांकि, अमेरिका और इजरायल दोनों ही ईरान पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों के लिए खतरा है। वहीं, ईरान हमेशा से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका मकसद कोई परमाणु हथियार बनाना नहीं है।
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Videsh
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