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क्या है AI टोकन? जो खेती से लेकर बिजनेस तक...बदल सकता है आपकी दुनिया

क्या है AI टोकन? जो खेती से लेकर बिजनेस तक...बदल सकता है आपकी दुनिया

'AI टोकन' डिजिटल युग की एक बेहद अहम करेंसी के तौर पर उभरा है। यह एक ऐसा फंडामेंटल यूनिट है जो हर इंटरैक्शन को मेजर करता है। टोकन AI की वह यूनिट है जो ...और पढ़ें





यहां जानें AI टोकन के बारे में। Photo- Gemini AI.


टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में टेक कंपनियों, खासकर चीन (Alibaba, ByteDance) और अमेरिका की कंपनियों के बीच, AI Tokens की कीमतों को लेकर जबरदस्त जंग छिड़ गई है। ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनियों ने अपने टोकन की कीमतें 90% तक कम कर दी हैं। असल में, टोकन AI की वह यूनिट है जो ये तय करती है कि AI ने आपके लिए कितना काम किया है। ठीक वैसे ही जैसे हम बिजली का हिसाब यूनिट्स में देखते हैं, AI के हर जवाब को टोकन में मापा जाता है। आप जितना लंबा सवाल पूछेंगे या AI जितना लंबा जवाब देगा, उतने ही ज्यादा टोकन खर्च होंगे।

यह इस तरह काम करता है

जब आप AI को कुछ लिखकर भेजते हैं, तो वह आपके पूरे वाक्य को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है, जिन्हें टोकन कहते हैं। इसे ऐसे समझिए: ठीक वैसे ही जैसे छोटे बच्चों को शब्द जोड़कर पढ़ना सिखाया जाता है। अंग्रेजी में, अक्सर एक शब्द एक ही टुकड़ा होता है, लेकिन हिंदी की बनावट थोड़ी अलग होती है। हिंदी में, स्वर और व्यंजन मिलकर एक शब्द बनाते हैं, इसलिए AI को एक हिंदी शब्द समझने के लिए उसे 2-3 टुकड़ों में तोड़ना पड़ता है। यही वजह है कि जब हिंदी में AI का इस्तेमाल किया जाता है, तो मीटर (टोकन की गिनती) थोड़ी तेजी से चलता है।

टोकन की कीमतों पर AI कंपनियों की होड़

AI कंपनियां अपनी सर्विसेज के लिए टोकन के आधार पर पैसे लेती हैं। यानी, आप AI से जितना लंबा सवाल पूछेंगे या उससे जितना लंबा जवाब लेंगे, उतने ही ज्यादा टोकन खर्च होंगे और उतना ही ज्यादा पैसा लगेगा। इस खर्च को कम करने के लिए, आजकल टेक कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ गया है। अब कई कंपनियां 10 लाख टोकन के लिए पैकेज रेट तय कर रही हैं, ताकि बड़े प्रोजेक्ट सस्ते में पूरे हो सकें। खासकर चीन की AI कंपनियों ने टोकन की कीमतें काफी कम कर दी हैं, जिससे AI का इस्तेमाल पहले से ज्यादा सस्ता हो गया है।





ये ठीक वैसा ही है जैसे टेलीकॉम कंपनियां कम कीमतों पर इंटरनेट डेटा देने के लिए आपस में मुकाबला करती हैं। इसलिए, अब AI की दुनिया में असली मुकाबला टोकन की कीमतों को लेकर है। जानकारों का मानना है कि जिस तरह इंटरनेट डेटा सस्ता होने से डिजिटल क्रांति आई थी, ठीक उसी तरह, जैसे-जैसे टोकन सस्ते होंगे, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार और मीडिया जैसे हर क्षेत्र में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।
अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी भाषा में 03 गुना ज्यादा टोकन इस्तेमाल होते हैं।
मॉडर्न AI मॉडल 20 लाख टोकन तक याद रख सकते हैं।
AI की मेमोरी और टोकन का खेल

टोकन ही AI की मेमोरी भी तय करते हैं। हर AI मॉडल की एक सीमा होती है कि वह एक बार में कितने टोकन याद रख सकता है; इसे 'कॉन्टेक्स्ट विंडो' कहा जाता है। जब बातचीत बहुत लंबी हो जाती है, तो नए टोकन जुड़ते जाते हैं और पुराने टोकन हटने लगते हैं। इसी वजह से AI पुरानी बातें भूल सकता है। इसी वजह से, टोकन सीधे तौर पर AI की समझ और याद रखने की क्षमता से जुड़े होते हैं। भविष्य में, इस क्षेत्र में वही कंपनी सबसे आगे रहेगी जो कम लागत और कम बिजली खर्च करके ज्यादा टोकन प्रोसेस कर सकेगी। इसलिए, बड़ी टेक कंपनियां अब ऐसी AI फैक्ट्रियां बना रही हैं जहां टोकन को बहुत तेज गति से प्रोसेस किया जा सके और AI को और भी ज्यादा शक्तिशाली बनाया जा सके।
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