'शिवालिक' के बाद 'नंदा देवी'... होर्मुज स्ट्रेट से निकला भारत का LPG से लदा दूसरा जहाज
'शिवालिक' के बाद 'नंदा देवी'... होर्मुज स्ट्रेट से निकला भारत का LPG से लदा दूसरा जहाज
ईरान ने अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकरों 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता दिया है। ...और पढ़ें
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भारतीय टैंकर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए।
ईरान ने अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच सुरक्षित मार्ग दिया।
पीएम मोदी-ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत के बाद यह संभव हुआ।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता दिया है। भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' ने सफलतापूर्वक इस स्ट्रेट को पार कर लिया है और अब दूसरा एलपीजी जहाज 'नंदा देवी' भी इस अहम तेल मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल गया है।
सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि 'शिवालिक' को भारतीय नौसेना सुरक्षा दे रही है। उम्मीद है कि यह जहाज अगले दो दिनों के भीतर किसी भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जाएगा और इसका संभावित गंतव्य मुंबई या कांडला हो सकता है। यह जहाज अब खुले समुद्र में पहुंच चुका है और भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है।
कितनी गैस लेकर आ रहा नंदा देवी जहाज?
उन्होंने बताया कि इस बीच 'नंदा देवी' 46,000 मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जा रही है, जो भारत की एनर्जी सप्लाई चेन के लिए बहुत जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों जहाजों को नेवल एसेट्स से करीब से गाइड किया जा रहा है ताकि स्ट्रेटेजिक रूप से संवेदनशील पानी से सुरक्षित ट्रांजिट पक्का किया जा सके।
पीएम मोदी ने की थी मसूद पेजेशकियन से बात
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच सामान और एनर्जी के फ्लो को लेकर हुई हाई-लेवल बातचीत के बाद उठाया गया है। इस बीच, भारत में ईरान के एम्बेसडर मोहम्मद फतली ने शुक्रवार को इशारा किया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है।
'भारत सरकार ने की हमारी मदद'
फतहली ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत और ईरान के साझा हित हैं। उन्होंने कहा, "हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देख लेंगे। हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत के हित एक जैसे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "भारत में राजदूत के तौर पर मैं यह कहना चाहूंगा कि इस स्थिति में युद्ध के बाद भारत सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में हमारी मदद की।"
ईरान ने अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकरों 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता दिया है। ...और पढ़ें
भारतीय टैंकर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए।
ईरान ने अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच सुरक्षित मार्ग दिया।
पीएम मोदी-ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत के बाद यह संभव हुआ।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता दिया है। भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' ने सफलतापूर्वक इस स्ट्रेट को पार कर लिया है और अब दूसरा एलपीजी जहाज 'नंदा देवी' भी इस अहम तेल मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल गया है।
सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि 'शिवालिक' को भारतीय नौसेना सुरक्षा दे रही है। उम्मीद है कि यह जहाज अगले दो दिनों के भीतर किसी भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जाएगा और इसका संभावित गंतव्य मुंबई या कांडला हो सकता है। यह जहाज अब खुले समुद्र में पहुंच चुका है और भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है।
कितनी गैस लेकर आ रहा नंदा देवी जहाज?
उन्होंने बताया कि इस बीच 'नंदा देवी' 46,000 मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जा रही है, जो भारत की एनर्जी सप्लाई चेन के लिए बहुत जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों जहाजों को नेवल एसेट्स से करीब से गाइड किया जा रहा है ताकि स्ट्रेटेजिक रूप से संवेदनशील पानी से सुरक्षित ट्रांजिट पक्का किया जा सके।
पीएम मोदी ने की थी मसूद पेजेशकियन से बात
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच सामान और एनर्जी के फ्लो को लेकर हुई हाई-लेवल बातचीत के बाद उठाया गया है। इस बीच, भारत में ईरान के एम्बेसडर मोहम्मद फतली ने शुक्रवार को इशारा किया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है।
'भारत सरकार ने की हमारी मदद'
फतहली ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत और ईरान के साझा हित हैं। उन्होंने कहा, "हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देख लेंगे। हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत के हित एक जैसे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "भारत में राजदूत के तौर पर मैं यह कहना चाहूंगा कि इस स्थिति में युद्ध के बाद भारत सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में हमारी मदद की।"
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