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महिला सैन्य अधिकारियों को मिलेगा परमानेंट कमीशन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सेना में पुरुषों का एकाधिकार नहीं

महिला सैन्य अधिकारियों को मिलेगा परमानेंट कमीशन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सेना में पुरुषों का एकाधिकार नहीं


सुप्रीम कोर्ट ने सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि गलत मूल्यांकन के क ...और पढ़ें




महिला सैन्य अधिकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)


गलत मूल्यांकन से वंचित महिला अधिकारियों को पूरी पेंशन।


20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी, पेंशन 2025 से।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सेना में पुरुषों का एकाधिकार नहीं।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सेना, नौसेना और वायु सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत आने वाली महिलाओं को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कह कि वे महिला सैन्य अधिकारी पूरे पेंशन की हकदार हैं, जिन्हें गलत मूल्यांकन के कारण परमानेंट कमीशन नहीं दिया गया था।


चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इन अधिकारियों को पेंशन के लिए जरूरी कम से कम 20 साल की सेवा पूरी की हुई माना जाएगा, भले ही उन्हें सेवा से पहले ही मुक्त कर दिया गया हो।

सुप्रीम कोर्ट यह फैसला कई याचिकाओं पर आया, जिनमें विंग कमांडर सुचेता एडन और अन्य द्वारा दायर याचिकाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने 2019 में हुए नीतिगत बदलावों और पिछले आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसलों के आधार पर परमानेंट कमीशन (PC) न दिए जाने को चुनौती दी थी।


लापरवाही से दिया जाता था ग्रेड

फैसला सुनाते हुए CJI ने कहा कि महिला अधिकारियों की सालाना गोपनीय रिपोर्ट (ACR) को अक्सर लापरवाही से ग्रेड दिया जाता था, इस सोच के साथ कि वे करियर में आगे बढ़ने या परमानेंट कमीशन के लिए योग्य नहीं होंगी। इससे उनकी कुल योग्यता पर बुरा असर पड़ा।

जल्दीबाजी में लिए जाते थे फैसले

वायु सेना के मामले में, बेंच ने पाया कि 2019 में लागू किए गए सेवा की अवधि के मानदंड और न्यूनतम प्रदर्शन के मानदंड जल्दबाजी में लागू किए गए थे, जिससे अधिकारियों को उन्हें पूरा करने का उचित मौका नहीं मिला।

1 नवंबर 2025 से लागू होगी पेंशन

सभी SSC अधिकारियों को जिनमें 2021 में सेवामुक्त की गई अधिकारी भी शामिल हैं- 20 साल की योग्य सेवा पूरी की हुई माना जाएगा। इसमें कहा गया कि पेंशन इस 20 साल की मानी गई सेवा के आधार पर तय की जाएगी, और यह 1 नवंबर, 2025 से लागू होगी।


हालांकि, कोर्ट ने ऑपरेशनल प्रभावशीलता का हवाला देते हुए दोबारा नौकरी पर रखने का आदेश देने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि यह वित्तीय लाभ देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता।

आर्मी और नेवी से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने उनके मूल्यांकन मॉडलों में भी इसी तरह की कमियां पाईं और कहा कि मूल्यांकन के मापदंडों का खुलासा न करने से इन अधिकारियों पर बुरा असर पड़ा।

कोर्ट ने उन अधिकारियों के लिए विंग कमांडर के पद तक काल्पनिक टाइम-स्केल प्रमोशन की मांग को खारिज कर दिया जो अब सक्रिय सेवा में नहीं हैं।
सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार नहीं

शीर्ष अदालत ने कहा कि अवसरों की कमी ने महिला अधिकारियों की योग्यता और करियर की प्रगति को प्रभावित कियाय़ उन्हें गलत तरीके से लंबी अवधि के करियर के लिए 'अनफिट' माना गया। कोर्ट ने साफ किया कि सेना में पुरुष अधिकारियों का एकाधिकार नहीं हो सकता है।
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