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बंगाल में वोटर लिस्ट से हटाए गए 58 लाख नाम', TMC के आरोप पर SC ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब

बंगाल में वोटर लिस्ट से हटाए गए 58 लाख नाम', TMC के आरोप पर SC ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब


टीएमसी सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने वैध दस्तावेजों को अ ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टीएमसी सांसद डोला सेन ने चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग से एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है और इसे पारदर्शिता की बड़ी चुनौती बताया है।


डोला सेन की याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेशिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान वैलिड दस्तावेजों को मानने से इनकार कर दिया, जिससे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लाखों नाम काट दिए गए। सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग विभिन्न चुनाव अधिकारियों को व्हाट्सऐप मैसेज या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से निर्देश दे रहा है, जो गलत है।


चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल

सिब्बल ने कहा कि ऐसे सभी निर्देश लिखित रूप में होने चाहिए ताकि वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की बेंच ने चुनाव आयोग के वकील एकलव्य द्विवेदी से कहा कि शनिवार तक याचिका पर जवाब दें। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की गई है। सेन ने 15 जनवरी की डेडलाइन को बढ़ाने की मांग की है। ये क्लेम और ऑब्जेक्शन देने की आखिरी तारीख है।

हटाए गए नामों के डिटेल्स

याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि परमानेंट रेसिडेंस सर्टिफिकेट, पंचायत रेसिडेंस सर्टिफिकेट और फैमिली रजिस्टर जैसे दस्तावेजों को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए वैलिड माना जाए। बंगाल की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 16 दिसंबर को पब्लिश हुई थी, जिसमें 58,20,898 नाम हटाए गए। सेन का आरोप है कि ये नाम बिना किसी नोटिस या पर्सनल हियरिंग के काट दिए गए।



2025 की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद वोटर्स की कुल संख्या 7,66,37,529 थी, जो अब घटकर 7,08,16,616 रह गई है। याचिका में कहा गया है कि एसओपी के उलट, कई असेंबली कंस्टीट्यूएंसी में एब्सेंटी, शिफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट (एएसडीडी) कैटेगरी के वोटर्स के नाम सेंट्रली प्रोसेस हो रहे हैं और 'डिस्पोज्ड - फॉर्म 7' मार्क कर दिए जा रहे हैं।


सेन को आशंका है कि फाइनल रोल के बाद बंगाल असेंबली इलेक्शन तुरंत अनाउंस हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह वोटर लिस्ट रिवीजन प्रोसेस को ठीक करे और सभी योग्य वोटर्स को शामिल करने की कोशिश करे।
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